चिट्ठाजगत रफ़्तार

Friday, July 16, 2010

तुम क्यों लगाते हो आँखों में काज़ल इतना.......

पल-पल नज़र में


मुझे भर रहा है कोई.........

दिल पर असर गहरा,

कर रहा है कोई.........

बो क्यों लगाते हैं,

काज़ल आँखों में,इतना

जिसके लिए हर पल,

ज़ल रहा है कोई..................................,

हदों की हदें,

पार कर रहा है कोई,

तुम्हें हद से भी ज्यादा,

प्यार कर रहा है कोई

तुम मुस्कुरा रही हो,

इतना,पता नहीं,

तुम्हारी हर अदा पर,

मर रहा है कोई.............................................।

Sunday, July 11, 2010

एक रात ,वरसात के साथ........

चलते –चलते उम्र बीत गई,


अब बीत ना जाये ये रैना भी...........

सोचा था कुछ कहें उनसे,

बाकी है दिल में कहना भी...........

अरमानों का जाल है मन में,

बचा है पूरा करना भी..............

माना,अगम,अगाध समुन्दर है,

पर, नाविक का काम है खेना भी..........

माँगने से नहीं डरते उस खुदा से,

उसका तो काम है देना भी..............

जिन शब्दों से कविता बनती है,

उन शब्दों को नहीं है खोना भी..............

अभी तक कटी,जैसे भी कटी,

बाकी है,मसीहा बनकर जीना भी.............

एक पैमाने में काँप जाते हैं,जिनके अधर,

बाकी है अभी,मधुशाला को पीना भी............

लिखते-लिखते सुबह हो गई,

इन आँखों को है सोना भी...............

चलते –चलते उम्र बीत गई,

अब बीत ना जाये ये रैना भी...........

Saturday, July 10, 2010

अगर है इश्क, तो.....................

न शरमाना ज़रुरी है,


न घबराना ज़रुरी है,

अगर है इश्क तो,

नज़र आना जरुरी है।

ये सारी एहतियातें,

वहतियातें,

सब वेबकूफी हैं,

अगर है इश्क तो,

हद से,

गुज़र जाना,

ज़रुरी है............।

Thursday, July 8, 2010

एक इवादत......................... मेरे इन्तकाल की.।

तन्हाइयों में जो ,


मेरे दिल का हाल पूछते हैं।

मेरी जिन्दगी से ,

एक बड़ा सवाल पूछते हैं

जो मुझे देते हैं,

मुहब्बत के बारे में मश़विरा,

मुहब्बत के बारे में मेरा ख्याल पूछते हैं........................

हमने तो मौत से, दो पल माँगे थे,

उनकी एक झलक पाने को,

और उनके दर पर गये

उन्हें मनाने को,

हमें तो उनकी रुश्वाई का,

अंदाजा भी नहीं था,

जो इवादत में मेरा इन्तकाल पूछते हैं..................................।

Wednesday, July 7, 2010

कीट हूँ,पतिंगा हूँ,ज़ान न्यौछावर दिये पर कर जाऊँगा...................................

मैं सूरज हूँ,


जला हूँ

रोशनी में,

पला हूँ

शाम होते-होते

ढला हूँ

ज़माने को रोशन

कर जाऊँगा.................

मै पानी हूँ,

वहा हूँ,

दर्दों को,

सहा हूँ

नदिय़ों में तन्हा,

रहा हूँ

आँसू बनकर आँखो से,

छलक जाऊँगा..............

प्रीत की

परीक्षा....

ना लेना मेरी,

बस इतनी सी,

थी चाहत मेरी,

प्रेमियों से

आगे मैं

निकल जाऊँगा..........

तुम जलते रहो,

दीपक की तरह,

पढते रहो,

रुपक की तरह,

मैं

कीट हूँ,

पतिंगा हूँ,

ज़ान न्यौछावर,

दिये पर,

यूँ ही,

कर जाऊँगा........................।

Tuesday, July 6, 2010

जिन्दगी जीने के केवल दो रास्ते हैं.............

हमें अपने इश्क का ,


हिसाब नहीं आता…………………..

और उनका पलटकर

कोई ज़बाब नहीं आता।

हम तो उनकी यादों में,

खोए रहते हैं अक्सर,

और उनको सोकर भी,

हमारा ख्वाब नहीं आता.................

शायद,

उन्हें इश्क,

करना नहीं आता………………..

और,

हमें इश्क के शिवा,

कुछ नहीं आता

जिन्दगी जीने के केवल दो रास्ते हैं

एक उन्हें नहीं आता....................

एक हमें नहीं आता.........................।

Friday, June 25, 2010

बो मिले ना मिले,मुहब्बत तुम करते रहना................

बो मिले ना मिले,


मुहब्बत तुम करते रहना................

डूब ना जाओ तब तलक,

आहें तुम भरते रहना......................

जिन्दा रहते हैं सब,

यहाँ मिलने की ख्वाहिश लेकर

होना पड़ जाए उसे मजबूर,

पल-पल तुम मरते रहना......................

गम भरे हैं तेरे,

इन दिल की गहराइयों में

रोते-रोते भर जाए समुन्दर,

पर तुम हँसते रहना........................

हैं इश्क के धागे बड़े नाजुक,

ये तुम्हें छोड़ देंगें

इबादत मानकर खुदा की,

उनमें तुम फँसते रहना...........................

कर रही है बो तेरा इन्तज़ार,

कहीं न कहीं

अश्क हों न उसके बरबाद,

तुम डरते रहना..............................

बो मिले ना मिले,

मुहब्बत तुम करते रहना................